Tuesday, October 27, 2020

निकिता बनी लव जिहाद की नई शिकार

 

राजधानी दिल्ली के करीब फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में कॉलेज से पेपर देकर निकली निकिता तोमर नाम की छात्रा के अपहरण की कोशिश। और अपहरण में नाकाम रहने पर छात्रा की सरेआम गोली मार की हत्या कर देना एक शर्मनाक घटना है। यह घटना कोई प्रेम प्रसंग में नाकाम रहने पर हुई है ऐसा नहीं है। घटना के पीछे पुलिस व समाज की लापरवाही और तेजी से बढती लव जिहाद की मानसिकता की एक बड़ी कहानी है। तौसीफ़ नाम का यह लड़का छात्रा को दो-तीन सालों से परेशान कर रहा था। तौसीफ़ निकिता को लव ज़िहाद के जाल में फंसाना चाहता था, लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहा। तब उसने छात्रा को परेशान करना शुरू कर दिया। परिवार ने बताया कि तौसीफ़ निकिता पर इस्लाम कवूल कर निकाह का दवाब बना रहा था। इसकी शिकायत निकिता और उसके परिवार ने 2018 में पुलिस से भी की, लेकिन पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों में राजीनामा कराकर घर भेज दिया। पुलिस की इस कड़ी कार्रवाई से तौसीफ़ इतना डर गया कि उसने शिद्दत के साथ निकिता को परेशान करना शुरू कर दिया। इसके लिये परिवार ने पंचायत समेत हर सामाजिक व्यवस्था से मदद मांगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इससे तौसीफ़ के हौसले और बढ़ते चले गये। तौसीफ़ ने निकिता को अगवा कर उसका धर्म परिवर्तन कर निकाह की साज़िश रची। उसने इस साज़िश को अंजाम देने के लिये अपने एक दोस्त को नूंह से बुलाया। दोनों ने निकिता के पेपरों के बारे में पूरी जानकारी निकाली और उसके कॉलेज के बाहर उसकी ताक में खड़े हो गये। जैसे ही निकिता कॉलेज से निकली तो तौसीफ़ उसे गाड़ी में बैठाने की कोशिश करता है, लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाता तो वो अपनी जेव से तमंचा निकालता है और छात्रा के सिर में गोली मार देता है।

  ये हत्या लव जिहादियों का उन कथित सेकुलरिज्म के कीड़ों के मुंह पर तमाचा है, जो लव जिहाद के जैसे किसी शब्द को नहीं मानते या यूं कहें कि वो मानना नहीं चाहते। क्योकि ये उनकी राजनीति के लिए सुविधाजनक नहीं है।

     हरियाणा सरकार को उन पुलिसकर्मियों पर भी हत्या का केस दर्ज करना चाहिए जिन्होंने 2018 में FIR होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की थी।

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